बचपन
क्यों गर्मी की छुट्टीको अब न होती बेचैन
मासूम शैतानियाँ और
खिलौने वाली ट्रेन ?
न होती बारिश के खड्डों में
छोटे पैरों की छप-छप
न स्कूल बस की सीट
सुनती घंटों वो गप-शप
न गली का चूरन
न पोपिन्स की गोली
अब न मैगी की ज़िद
और न शक्कर की चोरी
न पकड़म- पकड़ाई
करती घंटों का खेल
न छिपन-छिपाई का
अब होता है मेल
न दिखते पहाड़े में
परियों के पर
न कागज की नाव
न मोगली का घर
न झूठ-मूठ के गुस्से पे
अब माँ का मनाना
न मीठी सी धुन में
वो लोरी सुनाना
पोटली बाबा के किस्सों
को लेकर अपने संग
बादल के उस पार
क्यों लौट गया बचपन?
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